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Sunday, July 14, 2024
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Machilipatnam Lok Sabha Constituency: मछलीपट्टनम लोकसभा सीट पर वाईएसआरसीपी और टीडीपी के बीच मुकाबला, कौन मारेगा बाजी? | Machilipatnam lok sabha Constituency andhra pradesh election 2024 YSRCP tdp congress bjp


Machilipatnam Lok Sabha Constituency: मछलीपट्टनम लोकसभा सीट पर वाईएसआरसीपी और टीडीपी के बीच मुकाबला, कौन मारेगा बाजी?

मछलीपट्टनम लोकसभा सीट

आंध्र प्रदेश की मछलीपट्टनम लोकसभा सीट एक समय में कांग्रेस का गढ़ थी, जिसे तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने ढहा दिया था. इसके बाद टीडीपी ने इस पर कब्जा जमाया और 1991 से लेकर 2014 तक पांच बार लोकसभा चुनाव जीता, लेकिन उसके जीत के सिलसिले को युवजन श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने खत्म कर दिया. इस सीट पर आजादी के बाद पहली बार 1952 में चुनाव हुआ था और इस चुनाव में वाम दल ने सीट पर जीत हासिल की थी. इस लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें गन्नावरम, गुड़ीवाड़ा, पेडाना, पमारू, मछलीपट्टनम, अवनिगड्डा, और पेनामालुरु शामिल हैं. यह लोकसभा सीट कृष्णा और एनटीआर जिलों में आती है.

मछलीपट्टनम को आमतौर पर लोग मसूलीपट्टनम और बंडर के नाम से भी जानते हैं. इस शहर का नाम तेलुगु भाषा में ‘मसूली’ से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘मछली’, और ‘पटनम’ का अर्थ होता है ‘शहर’. यह शहर कृष्णा जिले में स्थित है. मछलीपट्टनम का प्राचीन बंदरगाह 16वीं शताब्दी से यूरोप के रहने वाले व्यापारियों के लिए सबसे पसंदीदा रहा है. बताया जाता है कि ये 17वीं शताब्दी में पुर्तगाली, ब्रिटिश, डच और फ्रेंच व्यापारियों के लिए मुख्य ट्रेडिंग बंदरगाहों में से एक रहा है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, इस क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या ज्यादा है. 1000 पुरुषों पर 1035 महिलाएं हैं और साक्षरता दर 83.32 फीसदी है.

मछलीपट्टनम है हथकरघा उद्योग

अमरावती से मछलीपट्टनम की दूरी 85 किलोमीटर है और यहां पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लगता है. मछलीपट्टनम के लिए ट्रेन और आंध्र प्रदेश रोडवेज बस की सेवा उपलब्ध है. शहर में एक बड़ा बस स्टैंड है, जिसे रोडवेज संचालित करती है. मछलीपट्टनम की खूबसूरती मांगीनापुड़ी बीच से बढ़ जाती है. शहर में कई पुरानी इमारतें हैं, जो कि खंडहर में बन चुकी हैं.

मछलीपट्टनम अपने हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता है. यहां अमेरिका और अन्य एशियाई देशों को निर्यात किए जाने वाले कलमकारी वस्त्रों का उत्पादन है. इसके अलावा स्थानीय उद्योग नाव बनाना और मछली पकड़ना भी है. 17वीं शताब्दी में मछलीपट्टनम यूरोपीय लोगों के लिए एक ट्रेडिंग बेस था और बंदरगाह के माध्यम से तांबे के सिक्के ढालने, हीरे, कपड़ा आदि के निर्यात के लिए जाना जाता था.

मछलीपट्टनम लोकसभा सीट पर कौन पार्टी कब जीती?

मछलीपट्टनम लोकसभा सीट पर अब तक कई पार्टियों ने चुनाव लड़ा है. 1952 में सीपीआई ने जीत हासिल की, 1957 में कांग्रेस ने, और 1962 में एक निर्दलीय प्रत्याशी ने इस सीट पर विजयी हुआ. इसके बाद कांग्रेस ने 1967, 1971, 1977, 1980, 1984 और 1989 में जीत हासिल की. 1991 में पहली बार टीडीपी ने इस सीट पर कांग्रेस को हराया और उसने 1996 में अपनी जीत को बरकरार रखा. कांग्रेस ने 1998 में टीडीपी को फिर हराया, लेकिन 1999 में टीडीपी ने वापसी कर ली. 2004 में कांग्रेस ने फिर से इस सीट पर कब्जा जमाया, लेकिन 2009 से 2014 तक उसे टीडीपी से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद वाईएसआरसीपी ने सभी को चौंका दिया. 2019 के लोकसभा चुनाव में वाईएसआरसीपी ने टीडीपी को मात दी.

मछलीपट्टनम लोकसभा सीट किसे-कितने मिले वोट?

चुनाव आयोग के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव में मछलीपट्टनम लोकसभा सीट पर वोटरों की संख्या 14 लाख 73 हजार 347 थी. यहां 84.47 फीसदी वोटिंग हुई थी. वाईएसआरसीपी के उम्मीदवार बालाशोवरी वल्लभनेनी को 5 लाख 72 हजार 850 वोट मिले थे, जबकि टीडीपी के उम्मीदवार कोनकल्ला नारायण राव के खाते में 5 लाख 12 हजार 612 वोट गए. वाईएसआरसीपी ने टीडीपी को 60 हजार 238 वोटों के अंतर से हराया था. कांग्रेस को 12310 वोट ही मिल सके थे. इससे ज्यादा वोट 14101 नोटा को मिले थे.



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