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Wednesday, July 17, 2024
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Kadapa Lok Sabha constituency: YSR की परंपरागत सीट कडप्पा, क्या TDP और कांग्रेस खिला पाएगी कोई गुल | kadappa Lok Sabha Elections 2024 High Profile Seat Andhra Pradesh MP YSR Rajasekhara Reddy


Kadapa Lok Sabha constituency: YSR की परंपरागत सीट कडप्पा, क्या TDP और कांग्रेस खिला पाएगी कोई गुल

कडप्पा लोकसभा सीट

आंध्र प्रदेश की कडप्पा लोकसभा सीट लंबे समय से हाई प्रोफाइल रही है. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी यहां से दो बार सांसद चुने जा चुके हैं. इससे पहले भी यह सीट उनके ही परिवार के पास रही है. वहीं, उनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चार बार यहां से सांसद रहे. फिर कांग्रेस के ही टिकट पर वाईएस विवेकानंद रेड्डी दो बार जीते. जगन मोहन रेड्डी भी पहली बार कांग्रेस के ही टिकट पर यहां से जीते थे. हालांकि दूसरी बार उन्होंने अपनी पार्टी वाईएसआरसीपी से जीत दर्ज की.

जगन मोहन रेड्डी के कांग्रेस से अलग होने के बाद इस सीट पर कांग्रेस पार्टी सिमट गई. इस समय भी इस लोकसभा सीट पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के ही नेता वाईएस अविनाश रेड्डी चुनाव लड़ कर जीतते आ रहे हैं. राज्य की सात विधानसभा क्षेत्रों बडवेल, कडप्पा, पुलिवेंदला, कमलापुरम, जम्मलमदुग्गु, प्रोद्दातुर, मायदुकुर को मिलाकर आजादी के बाद हुए परिसीमन में इस लोकसभा सीट का गठन किया गया. राज्य के दक्षिणी हिस्से में यह शहर रायलसीमा क्षेत्र में स्थित है.

हिरण्यनगरम भी है एक नाम

इस शहर का नाम तेलुगु शब्द “गडपा” के अपभ्रंस से बना है. हिन्दी में इसका अर्थ दहलीज होता है. दरअसल, प्राचीन काल में तिरुमाला की पहाड़ियों पर जाने का रास्ता कडप्पा के बीच से था. बल्कि कडप्पा को तिरुमाला की पहाड़ियों का प्रवेश द्वार कहा जाता था. हाल ही में यहां कुछ कुछ शिलालेख भी मिले हैं. इन शिलालेखों में इस शहर का नाम हिरण्यनगरम कहा गया है. मान्यता है कि रामायण के सात कांडों में एक किष्किन्धाकाण्ड की घटना कडपा के वोंटिमिट्टा में हुई है.

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यहीं पर राम ने मांगी थी हनुमान से मदद

कडप्पा से करीब 20 किमी की दूरी पर स्थित वोंतमित्ता के आंजनेय स्वामी गांडी के बारे में कहा जाता है कि भगवान राम ने अपने बाण से गांडी पर आंजनेय स्वामी विग्रहम बनाया था. मान्यता है कि यहीं पर भगवान राम ने हनुमान जी से सीता की खोज का आग्रह किया था. मध्यकाल में कडप्पा की ही धरती पर वेमना, पोतुलूरी वीराब्रह्मम, अन्नमाचार्य, पेम्मसानी तिम्मा नायुडू आदि महापुरूष पैदा हुए. ग्यारहवी से चौदवीं सदी तक कडप्पा चोल साम्राज्य का हिस्सा रहा. चौदवीं सदी के आखिर में विजयनगर साम्राज्य का आधीन हो गया.

खेती है आय का मुख्य आधार

1565 में यह मुगलों के कब्जे में आया तो 1800 में यहां का शासन अंग्रेजों ने अपने हाथ में ले लिया. इस नगर में रोजी रोजगार का मुख्य आधार खेती बारी है. यहां पर खासतौर पर मूंगफली, कपास, लाल चना, बंगाली चना आदि फसलों का उत्पादन होता है. हालांकि यहां खनन और पर्यटन से भी काफी आय होती है और इस क्षेत्र में काफी रोजगार मिला हुआ है. आंध्र प्रदेश के प्रमुख शहर अमरावती से कडप्पा की दूरी लगभग 367 किलोमीटर है और यहां पहुंचने में करीब साढ़े सात घंटे लगते हैं. कडप्पा ट्रेनों, स्टेट रोडवेज की बसों और हवाई यात्रा के जरिए पहुंचा जा सकता है. कडप्पा एयरपोर्ट 2015 को खोला गया था.

इस सीट पर कौन-कब जीता?

आजादी के बाद कडप्पा लोकसभा सीट पर पहली बार वोटिंग 1952 में हुई थी और पहली बार सीपीआई ने जीत हासिल की थी. इसके बाद 1957 में कांग्रेस, 1962, 1967, 1971 में सीपीआई, 1977-1980 में कांग्रेस, 1984 में टीडीपी, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 में कांग्रेस जीती. इसके बाद 2012, 2014, 2019 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की.



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