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Thursday, July 18, 2024
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Gudi Padwa 2024: गुड़ी पड़वा कैसे और क्यों मनाते हैं लोग? जानें क्या है परंपरा और महत्व | Gudi Padwa 2024 Kaise or Kyo Manate Hai Know Importance


Gudi Padwa 2024: गुड़ी पड़वा कैसे और क्यों मनाते हैं लोग? जानें क्या है परंपरा और महत्व

गुड़ी पड़वा कैसे और क्यों मनाते हैं लोग? जानें परंपरा और महत्व

Gudi Padwa 2024: हिन्दू धर्म में गुड़ी पड़वा का त्योहार हर साल चैत्र महीने के पहले दिन बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. इस दिन को उगादि के नाम से भी जाना जाता है. नववर्ष 2024 में गुड़ी पड़वा 09 अप्रैल 2024, दिन मंगलवार को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास से होती है. महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है. बता दें कि गुड़ी का अर्थ है ध्वज यानी झंडा और प्रतिपदा तिथि को पड़वा कहा जाता है. इसके अलावा यह दिन फसल दिवस का प्रतीक भी माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु व ब्रह्मा जी की पूजा भी की जाती है. लोग इस दिन घर को रंगोली, फूल-माला आदि से सजाते हैं और कई तरह के पकवान बनाते हैं.

गुड़ी पड़वा के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान आदि के बाद विजय के प्रतीक के रूप में घर में सुंदर गुड़ी लगाती हैं और उसका पूजन करती हैं. यह पर्व विशेष तौर पर कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है.

गुड़ी पड़वा शुभ मुहूर्त

गुड़ी पड़वा की प्रतिपदा तिथि 08 अप्रैल 2024 को रात 11:50 बजे से शुरू होगी और प्रतिपदा तिथि 09 अप्रैल 2024 को शाम 08:30 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के हिसाब से गुड़ी पड़वा का पर्व 9 अप्रैल को ही मनाया जाएगा.

ऐसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा

  • गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों की सफाई कर रंगोली और आम या अशोक के पत्तों से अपने घर में तोरण बांधते हैं.
  • घर के आगे एक झंडा लगाया जाता है जिसे गुड़ी कहा जाता है.
  • एक बर्तन पर स्वस्तिक बनाकर उस पर रेशम का कपड़ा लपेट कर रखा जाता है.
  • इस दिन सूर्यदेव की आराधना के साथ ही सुंदरकांड, रामरक्षास्रोत और देवी भगवती की पूजा-मंत्रों का जप किया जाता है.
  • स्वास्थ्य कामना हेतु नीम की कोपल गुड़ के साथ खाई जाती हैं. इससे लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है.
  • गुड़ी पड़वा के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं. एक-दूसरे के घर मिलने के लिए जाते हैं.
  • इस पर्व में पूरन पोली और श्रीखंड बनाया जाता है. मीठे चावल भी बनाएं जाते हैं, जिसे शक्कर-भात भी कहा जाता है.
  • इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है और लोग गुड़ी फहराते हैं और गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

गुड़ी पड़वा से जुड़ी ये हैं मान्यताएं

पौराणिक कथाओं के अनुसार, गुड़ी पड़वा का दिन सृष्टि की रचना के रूप में मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन ही भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था. इसलिए इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा का विशेष महत्व है. इसके अलावा एक और मान्यता है कि इस दिन ही छत्रपति शिवाजी महाराज ने विदेशी घुसपैठियों को युद्ध में पराजित किया था. कहते हैं कि गुड़ी पड़वा के दिन बुराइयों का अंत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रामायण काल में दक्षिण भारत में जब सुग्रीव के बड़े भाई बाली का अत्याचारी शासन था और जब सीता माता की खोज के दौरान श्री राम की मुलाकात सुग्रीव से हुई तो उन्होंने बाली के अत्याचारों की जानकारी मिली. तब भगवान राम ने बाली का वध करके वहां की प्रजा को अत्याचार से मुक्ति दिलाई. उस दिन गुड़ी पड़वा का ही दिन था.



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