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Wednesday, July 17, 2024
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Sambalpur Lok Sabha Seat: संबलपुर में 15 साल में हर बार बदल रही जीत, BJP के पास सीट बचाने की चुनौती | Sambalpur Lok Sabha constituency Profile Biju janata dal BJP Congress india elections 2024


ओडिशा का संबलपुर जिला अपनी संबलपुरी साड़ी के लिए दुनियाभर में जाना और पहचाना जाता है. ओडिशा में दोहरा चुनावी रोमांच बना हुआ है. यह उन चंद राज्यों में जहां पर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा रहे हैं. राज्य में बीजू जनता दल (BJD) का जबर्दस्त दबदबा है. राज्य की संबलपुर जिले की संबलपुर लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जीत मिली थी. हालांकि इस सीट पर कभी किसी दल की लंबे समय तक पकड़ नहीं रही है.

माना जाता है कि पूर्वी राज्य ओडिशा के पश्चिमी क्षेत्र में आने वाले संबलपुर जिले का नाम देवी समलाई के नाम पर रखा गया है, जिनकी पत्थर की मूर्ति की खोज संबलपुर के पहले राजा बलराम देव ने की थी. आधुनिक इतिहास में 1905 में जिले को ओडिशा के साथ मिला दिया गया. संबलपुर जिले को चार अलग-अलग जिलों में बांटा गया है.

विधानसभा में संबलपुर में किसकी पकड़

जिले में कई ऐतिहासिक स्थान हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. हीराकुंड बांध और इसकी झील नियमित रूप से साइबेरिया से आए प्रवासी पक्षियों से घिरी रहती है. हुमा का झुका हुआ मंदिर, बद्रमा (उषाकुथी), खलासुनी और देबरीगढ़ (बारापहाड़ पर्वत श्रृंखला-चौरासिमल में वन्यजीव अभयारण्य) और घंटेश्वरी मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं. इस क्षेत्र की प्रमुख देवी समलेश्वरी महानदी के तट पर ‘समलाई गुड़ी’ में प्रतिष्ठित हैं. यहां का दूसरा प्रसिद्ध मंदिर बुधराजा मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है और बुधराजा पहाड़ी पर स्थित है.

संबलपुर जिले के तहत 7 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें 4 सीटों पर बीजेडी तो 3 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी. यहां की 7 सीटों में से 2 सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं. जिले के तहत संबलपुर लोकसभा सीट बनाई गई जिसमें 3 जिलों की विधानसभा सीटों को शामिल किया गया. संबलपुर की 4, देवगढ़ की एक और अंगुल की 3 सीटों को मिलाकर संसदीय सीट बनाई गई.

2019 के संसदीय चुनाव में किसे मिली जीत

2019 के संसदीय चुनाव में संबलपुर में बीजेपी के नीतेश गंगा देब को कड़े मुकाबले के बाद जीत मिली थी. नीतेश गंगा देब को चुनाव में 473,770 वोट मिले थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजू जनता दल की नलिनी कांता प्रधान को 464,608 वोट आए. कांग्रेस के सरत पटनायक तीसरे स्थान पर रहे थे. नीतेश गंगा देब ने कड़े संघर्ष में 9,162 मतों के अंतर से चुनाव में जीत हासिल की.

इस चुनाव में तब संबलपुर सीट पर कुल 13,99,694 वोटर्स थे जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 7,13,524 थी तो महिला वोटर्स की संख्या 6,86,082 थी. इसमें से कुल 11,24,455 (81.3%) वोटर्स ने वोट डाले. NOTA के पक्ष में 13,456 वोट आए थे. यहां पर चुनाव मैदान में 11 लोगों ने अपनी किस्मत आजमाई थी.

संबलपुर सीट का राजनीतिक इतिहास

संबलपुर संसदीय सीट के राजनीतिक इतिहास को देखें तो यहां पर पिछले 3 चुनाव में जीतने वाली पार्टी का नाम बदल जाता है. 90 के दशक के बाद यहां पर कांग्रेस को जीत मिलती रही, फिर बीजू जनता दल ने यहां पर अपना कब्जा जमाया. 2019 में यह सीट बीजेपी के खाते में चली गई. 1991 और 1996 में कांग्रेस के कृपासिंधु भोई लगातार 2 बार चुनाव जीते थे. 1998 में बीजू जनता दल ने पहली बार जीत का स्वाद चखा. कृपासिंधु भोई 4 बार यहां से सांसद रहे.

बीजू जनता दल के कद्दावर नेता प्रसन्ना आचार्य ने यहां पर जीत हासिल की. प्रसन्ना आचार्य ने 1998 के बाद 1999 और 2004 में जीत दर्ज कराते हुए जीत की हैट्रिक लगाई थी. 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर से वापसी की और उसके प्रत्याशी अमरनाथ प्रधान को जीत मिली. 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बीच संबलपुर सीट पर बीजेडी के नगेंद्र प्रधान ने बाजी मार ली थी. हालांकि 2019 में यह सीट बीजेपी के कब्जे में आ गई.

संबलपुर सीट पर ST वोटर्स अहम

अपनी साड़ी के लिए मशहूर संबलपुर जिला ओडिशा के पश्चिमी भाग में बसा हुआ है. यह जिला पूर्व में देवगढ़, पश्चिम में बारगढ़, उत्तर में झारसुगुड़ा और दक्षिण में सोनपुर तथा अंगुल जिलों से घिरा हुआ है. संबलपुर जिले का स्वतंत्रता संग्राम में खासा योगदान रहा है. एक समय संबलपुर जिले बहुत बड़ा क्षेत्र में फैला हुआ था. लेकिन बाद में उसे 4 अलग-अलग जिलों में बांट दिया गया. 1993 में बारगढ़ जिले को अलग कर दिया गया फिर 1994 में झारसुगुड़ा और देवगढ़ को अलग करते हुए नया जिला बना दिया गया.

यह जिला 6,702 वर्ग किमी के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है. 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल आबादी 10,41,099 है. जिले में पुरुषों की कुल आबादी 5,26,877 है जबकि महिलाओं की जनसंख्या 5,14,222 है. इसमें अनुसूचित जाति के कुल 1,91,827 लोग हैं तो अनुसूचित जनजाति के 3,55,261 लोग यहां रहते हैं.



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