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Thursday, July 18, 2024
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Nagarkurnool Lok Sabha Seat: कभी कांग्रेस का गढ़ था, अब BRS का कब्जा; जानें नगरकुरनूल का सियासी समीकरण | telangana history of nagarkurnool lok sabha constituency Know political equations bjp brs congress stwas


Nagarkurnool Lok Sabha Seat: कभी कांग्रेस का गढ़ था, अब BRS का कब्जा; जानें नगरकुरनूल का सियासी समीकरण

नगरकुरनूल लोकसभा सीट.

नगरकुरनूल लोकसभा सीट तेलंगाना की 17 सीटों में से एक है. यह अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है. पहले यह सीट महबूबनगर जिले के अंतर्गत आती थी, लेकिन 2016 में जिलों के पुर्नगठन के बाद नगरकुरनूल को अलग जिला ही बना दिया गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर BRS (भारत राष्ट्र समिति) उम्मीदवार पोथुगंती रामुलु ने जीत दर्ज की थी. 1962 से इस लोकसभा सीट पर चुनाव हो रहे हैं, तब से लेकर अब तक विभिन्न पार्टियों के 12 उम्मीदवारों ने इसका प्रतिनिधित्व किया है.

बता दें कि नगरकुरनूल को देश के तीसरे लोकसभा चुनाव के दौरान 1962 में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र बनाया गया था. पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी जे. रामेश्वर राव ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. हालांकि इसके बाद वह चुनाव नहीं जीत पाए. नगरकुर्नूल लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 6 बार कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों ने इस सीट पर जीत दर्ज की है.

महबूबनगर जिले का हिस्सा था नगरकुरनूल

नगरकुरनूल को 2016 में जिला बनाया गया था. इससे पहले यह महबूबनगर जिले का हिस्सा था. धार्मिक रूप से इस क्षेत्र का बड़ा महत्व है. रामनगर में प्रसिद्ध रामास्वामी मंदिर है, जबकि कुछ दूर पर ईदम्मा मंदिर भी है. बड़ी संख्या में लोग यहां कामनापूर्ति के लिए यहां आते हैं. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से यहां की 118 किलोमीटर दूर है.

2019 में BRS प्रत्याशी ने दर्ज की थी जीत

नगरकुरनूल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें वानापर्थी, गढ़वाल, आलमपुर, नागरकुर्नूल, अचम्पेट, कलवाकुरति, कोल्लापूर विधानसभा सीटें हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव से इस सीट का अलग-अलग उम्मीदवार प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं, जिसमें 2009 में कांग्रेस से मंदा जगन्नाथ, फिर 2014 में कांग्रेस से नंदी येलैया और 2019 में BRS के पोथुगंती रामुलु ने जीत दर्ज की.

पहले इस नाम से जाना जाता था नगरकुरनूल

नगरकुरनूल को पहले ‘पलामूरू’ के नाम से जाना जाता था. क्षेत्रफल के हिसाब सेयह तेलंगाना का तीसरा सबसे बड़ा जिला है.यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी है. आलमपुर, जटाप्रोले, मदीमदुगु, कोल्लापुर और गंगापुर जैसे स्थान कुछ ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों जैसे जोगुलाम्बा मंदिर और अन्य, दरगाहों और चर्चों के लिए प्रसिद्ध हैं. आर्थिक रूप से इस जिले को पिछड़े क्षेत्र में के रूप में मान्यता दी गई है.

500 साल पुराना इतिहासा समेटे है नगरकुर्नूल

नगरकुरनूल 11 अक्टूबर 2016 को तेलंगाना राज्य में बनाया गया नया जिला है. यह पहले महबूबनगर में था. नए जिले में तीन राजस्व मंडल हैं, नगरकुरनूल, अचम्पेट, कलवाकुर्थी और कुल 20 मंडल हैं. नगरकुरनूल का इतिहास 500 वर्ष से भी अधिक पुराना है. नगरकुरनूल का नाम राजा नागाना और कंदना के नाम पर रखा गया था, जो वर्तमान नगरकुरनूल और आसपास के क्षेत्र पर शासन करते थे. नागानूल गांव (जिसका नाम नागाणा के नाम पर रखा गया था) अभी भी मौजूद है, जो नगरकुरनूल से लगभग एक किमी दक्षिणपूर्व में स्थित है. करीब 120 साल पहले नगरकुर्नूल अधिकांश दक्षिण तेलंगाना क्षेत्र के लिए परिवहन और जिला मुख्यालय का एक मुख्य जंक्शन था.

इन जिलों से लगती है नगरकर्नूल जिले की सीमा

नगरकुरनूल जिले का क्षेत्रफल 6,924 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. जिले की सीमा नलगोंडा, रंगारेड्डी, महबूबनगर, वानापर्थी जिलों और आंध्र प्रदेश राज्य की सीमा कुरनूल, गुंटूर और प्रकाशम जिलों से लगती हैं. यह मध्य दक्कन के पठार और ग्रेनाइट चट्टान और पहाड़ी संरचनाओं के नल्लामल्ला पहाड़ियों के उत्तरी भाग पर स्थित है. कृष्णा नदी जिले की दक्षिणी सीमा से होकर बहती है.



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