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Wednesday, July 17, 2024
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Mahabubnagar Lok Sabha Seat: कभी कांग्रेस का गढ़ रहा महबूबनगर, अब BRS की गुलाबी लहर; 3 बार से लगातार जीत रही | telangana history of mahabubnagar lok sabha constituency k chandrashekar rao bjp brs congress stwas


Mahabubnagar Lok Sabha Seat: कभी कांग्रेस का गढ़ रहा महबूबनगर, अब BRS की गुलाबी लहर; 3 बार से लगातार जीत रही

महबूबनगर लोकसभा सीट.

महबूबनगर लोकसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी, तब यह आंध्र प्रदेश का हिस्सा हुआ करती थी. शुरुआत से ही यह कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही है. कांग्रेस ने यहां हुए 16 आम चुनावों में से 10 में जीत हासिल की है. हालांकि, बीच-बीच में तेलंगाना प्रजा समिति, बीजेपी और जनता पार्टी के उम्मीदवार भी यहां से जीत हासिल करते रहे हैं. तेलंगाना आंदोलन के समय यहां से पूर्व मुख्यमंत्री और BRS चीफ चंद्रशेखर राव जनता के प्रतिनिधि थे.

इस सीट से सबसे ज्यादा चार बार दो सांसद चुने गए. इनमें से एक जे. रामेश्वर हैं, जो तीन बार कांग्रेस के टिकट पर और एक बार तेलंगाना प्रजा समिति के टिकट पर चुनाव जीते. इनके अलावा डॉ. मल्लिकार्जुन भी चार बार सांसद चुने गए, तीन बार कांग्रेस के टिकट पर और एक बार कांग्रेस (इंदिरा) के टिकट पर. इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी भी 8वीं और 12वीं लोकसभा में यहीं से चुने गए थे.

3 बार से लगातार जीत रही BRS

महबूबनगर लोकसभा सीट तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों में से एक है. आजादी के बाद से अब तक इस लोकसभा सीट पर 16 बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें सबसे अधिक बार कांग्रेस प्रत्याशियों ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है. हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए तीनों लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इस सीट पर सफलता नहीं मिली. तीनों चुनाव में BRS (भारत राषट्र समिति) के अलग-अलग उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. 2009 में जहां BRS चीफ के. चंद्रशेखर राव विजयी हुई तो वहीं 2014 में BRS के टिकट पर एपी जितेंदर रेड्डी ने जीत दर्ज की. 2019 के चुनाव में BRS के मन्ने श्रीनिवास रेड्डी सांसद चुने गए.

पहले किस नाम से जाना जाता था महबूबनगर?

18,419 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाला तेलंगाना का महबूबनगर जिला दक्कन के पठार पर स्थित है. इस क्षेत्र को ‘पालमूर’ के नाम से भी जाना जाता है. महबूबनगर तेलंगाना का दूसरा सबसे बड़ा जिला है. टेराकोटा शैली के जैन मंदिर, जो सबसे प्रचीन है, वो भी इसी महबूबनगर में हैं. ये जैन मंदिर 7वीं और 8वीं शताब्दी के बीच बनवाए गए थे. यहां राजकीय संग्रहालय भी है. यह क्षेत्र दक्षिण में कृष्णा नदी से घिरा है. गोलकुंडा के प्रसिद्ध हीरे महबूबनगर की खदानों से ही निकाले गए थे.

2019 में BRS प्रत्याशी ने दर्ज की थी जीत

महबूबनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें कोडंगल, नारायणपेट, महबूबनगर, जडचेरला, देवरकड़ा, मकथल और शादनगर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में महिला-पुरुष और थर्ड जेंडर मिलाकर मतदाताओं की संख्या करीब 15 लाख के आसापस है. 2019 में कुल 9 लाख 84 हजार 634 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुष मतदाता 4,94,155 और महिला मतदाता 4,89,732 थीं. BRS के विजयी प्रत्याशी मन्ने श्रीनिवास रेड्डी को 4,11,402 वोट मिले थे.

हैदराबाद से महबूबनगर की दूरी 100 किलोमीटर

महबूबनगर लोकसभा क्षेत्र तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कपास की ओटाई, गांठ बनाने का काम, तेल और चावल मिल यहां के प्रमुख उद्योग हैं. दक्षिण-पूर्व में स्थित पर्वतों से सागौन, आबनूस और गोंद प्राप्त होता है. वहीं यहां की बलुई मिट्टी में ज्वार-बाजरा, तिलहन और चावल की खेती खूब होती है. यहां पलामुरु विश्वविद्यालय सबसे बड़ा शैक्षिक संस्थान है. कहा जाता है कि गोलकुंडा के प्रसिद्ध हीरे भी इसी जिले से मिले थे.

किस शासक के नाम पर महबूबनगर नाम रखा गया?

पूर्व में महबूबनगर ‘रुक्मम्मपेटा’ और ‘पालमूर’ के नाम से जाना जाता था. 1890 में हैदराबाद के निजाम वंश के शासकों में से एक मीर महबूब अली खान आसफ जाह चतुर्थ के सम्मान में महबूबनगर का नाम रखा गया. महबूबनगर तेलंगाना राज्य का दूसरा सबसे बड़ा जिला है. यह हैदराबाद-बैंगलुरु की सड़कों और रेल नेटवर्क से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. यह दक्षिण भारत में सातवाहन राजवंश और फिर चालुक्य वंश के शासन के अधीन था, जो 5वीं और 11वीं शताब्दी ईस्वी के बीच था.

यहां का आलमपुर पर्यटन का केंद्र

बाद में यह गोलकुंडा राज्य और अंत में हैदराबाद राज्य के अधीन हो गया था. कृष्णा और तुंगभद्रा नदियां इस जिले से होकर बहती हैं. डिंडी नदी, इस जिले में कृष्णा नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी भी है. महबूबनगर जिला प्रसिद्ध मंदिरों और ऐतिहासिक महत्व के कई धार्मिक और विरासत स्थलों का घर माना जाता है. यहां का आलमपुर आस्था प्रेमी को खूब आकर्षित करता है. श्रीशैलम की तीर्थ यात्रा करने काफी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए यहां चार प्रवेश द्वार हैं. वह हैं दक्षिण में सिद्धावतम, पूर्व में त्रिपुरान्तक उत्तर में उमा महेश्वर औरपश्चिम में आलमपुर.



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