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Sunday, July 14, 2024
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Gwalior Lok Sabha Seat: सिंधिया राजघराने के दबदबे वाली है ग्वालियर लोकसभा सीट… | Lok Sabha election 2024 Gwalior constituency seat Scindia family BJP Congress stwn


मध्य प्रदेश के चार महानगरों में से एक ग्वालियर पूरे देश में तानसेन की नगरी नाम से भी प्रसिद्ध है. यहां आज भी कई संगीत घराने हैं जो कि पीढ़ियों से संगीत को सिखाने का काम कर रहे हैं. ग्वालियर जिले में पूरे ग्वालियर जिला और कुछ हिस्सा शिवपुरी जिले का भी आता है. इस पूरे क्षेत्र की राजनीति कई सालों से सिंधिया राजघराने के आस-पास ही घूम रही है. इसी सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया लंबे वक्त तक लोकसभा में रहे हैं. उनके बास यशोधरा ने भी इस सीट से जीत हासिल की है.

चंबल क्षेत्र से सटे ग्वालियर शहर में यहां बना किला आज भी यहां की ऐतिहासिक धरोहर को बयां करता है. किले के अलावा यहां पर जयविलास पैलेस भी बना है जहां पर सिंधिया राजघराने के कई प्राचीन कलेक्शन आपको यहां देखने को मिल सकता है. यहां मौजूद कई स्मारक और किले सिंधिया राजघराने से संबंधित हैं. यहां पर स्थित मनमंदिर महल और तानसेन स्मारक भी दर्शनीय स्थलों में से एक हैं. इसके अलावा इस शहर की जीवाजी यूनिवर्सिटी में न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश के कई छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं.

ग्वालियर और चंबल संभाग पर असर

ग्वालियर की राजनीति यूं कहें कि सिंधिया राजघराने की राजनीति का असर न सिर्फ ग्वालियर बल्कि चंबल क्षेत्र में पड़ता है. दरअसल ग्वालियर और चंबल संभाग एक दूसरे से पूरी तरह से सटे हुए हैं और इनमें से अधिकांश क्षेत्र सिंधिया राजघराने के अंतर्गत आता था. इसी वजह से यहां के हर क्षेत्र में राजघराने से सीधे तौर पर जुड़े लोगों की लंबी फहरिस्त है. गालव ऋषि की तपोभूमि रहा यह क्षेत्र कछवाहा राजवंशों की राजधानी हुआ करता था. इससे पहले यहां पर गुर्जर, प्रतिहार, तोमर राजवंश रह चुके हैं. गालव ऋषि की वजह से इस क्षेत्र का नाम ग्वालियर पड़ा है.

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सिंधिया परिवार की राजनीति

1984 में सबसे पहले इस सीट से माधवराव सिंधिया ने चुनाव लड़ा था. उन्होंने कांग्रेस से चुनाव लड़ा और जीत अपने नाम दर्ज की. 1984 से लेकर 1988 तक माधवराव सिंधिया ने यहां से चुनाव लड़ा और जीता. इसके बाद 2007 उपचुनाव और 2009 के चुनाव में यहां से राजपरिवार की यशोधरा राजे सिंधिया ने चुनाव जीता. हालांकि माधवराव सिंधिया ने इसके बाद गुना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और वहां से भी जीते.

राजघराने पर टिकी राजनीति

इस लोकसभा सीट पर राजघराने का काफी प्रभाव है, हालांकि कुछ चुनाव में यह प्रभाव हल्का होते हुए भी देखा गया है. खैर 2014 में यहां से नरेंद्र सिंह तोमर ने चुनाव लड़ा था और भारी भरकम अंतर से जीत अपने नाम की थी. इसके बाद 2019 के चुनाव में यहां से बीजेपी ने नारायण शेजवालकर को उम्मीदवार बनाया था और कांग्रेस ने अशोक सिंह पर विश्वास जताया था. शेजवालकर ने अशोक सिंह को करीब डेढ़ लाख वोटों से हराया था. इस लोकसभा सीट पर करीब 21 लाख मतदाता हैं.



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