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Thursday, July 18, 2024
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Sabarkantha Lok Sabha Seat: यहां 11 बार कांग्रेस ने की जीत दर्ज, गुलजारी लाल नंदा थे पहले सांसद, अब लहरा रहा भगवा | Sabarkantha Lok Sabha Election 2024 BJP Congress NDA India Alliance stwar


Sabarkantha Lok Sabha Seat: यहां 11 बार कांग्रेस ने की जीत दर्ज, गुलजारी लाल नंदा थे पहले सांसद, अब लहरा रहा भगवा

गुलजारी लाल नंदा तीन बार बने यहां से सांसद
Image Credit source: tv9 भारतवर्ष

साबरकांठा गुजरात का एक जिला है और इसी नाम से एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भी. साबरमती नदी के किनारे बसे साबरकांठा का प्रशासनिक मुख्यालय अहमदाबाद से लगभग 80 किलोमीटर दूर हिम्मतनगर है. भारत के दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारी लाल नंदा ने यहां हुए पहले चुनाव में जीत दर्ज की थी. वह यहां से लगातार तीन बार सांसद रहे थे. इसके बाद 1967 में हुए चुनाव में स्वतंत्र पार्टी ने कांग्रेस को शिकस्त दी थी. यहां हुए अबतक के चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने 11 बार जीत दर्ज की है जबकि बीजेपी ने चार बार. वर्तमान में यहां बीजेपी के दीपसिंह शंकरसिंह राठौड़ सांसद है. दीपसिंह शंकरसिंह राठौड़ ने 2019 में दूसरी बार जीत दर्ज की है.

2019 में दीपसिंह शंकर राठौड़ की दूसरी जीत

2019 में बीजेपी के दीपसिंह शंकरसिंह राठौड़ को 57.6% वोट मिले थे जबकि कांग्रेस पार्टी के ठाकोर राजेंद्रसिंह शिवसिंह को 35.5%. तीसरे स्थान पर रहे है निर्दलीय रावल राजूभाई पंजाबभाई को 1.4%, चौथे स्थान पर पठान अय्यूबखान अजबखान को 1.4 प्रतिशत मत मिले.पांचवे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के विनोदभाई जेठाभाई मेसरिया को 0.6%. वोट मिले थे. 2019 में यहां कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे. साबरकांठा में जीत दर्ज करने वाले बीजेपी के राठौड़ दीपसिंह शंकरसिंह ने ठाकोर राजेंद्रसिंह शिवसिंह को 2,68,987 वोटों से हराया था. दीपसिंह शंकरसिंह को 701,984 जबकि शिवसिंह को 4,32,997 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर रहे रावल राजूभाई पंजाबभाई को 17,175, पठान अय्यूबखान अजबखान को 9,177 और बीएसपी के विनोदभाई जेठाभाई मेसरिया को 7,912 वोट मिले थे.

इससे पहले 2014 में यहां बीजेपी के दीपसिंह शंकरसिंह राठौड़ ने कांग्रेस के बड़े नेता शंकरसिंह वाघेला को 84,455 वोटों से हराया था. तीसरे स्थान पर रहे चंदूभाई भाम्भी को नोटा के 18,249 वोट से भी कम 16,665 वोट मिले थे.

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साबरकांठा का चुनावी इतिहास

साबरकांठा में हुए सबसे पहले चुनाव में कांग्रेस पार्टी के गुलजारी लाल नंदा ने जीत दर्ज की थी. गुलजारी लाल नंदा ने 1952, 1957 और 1962 के चुनाव में लगातार जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1967 में हुए चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के चंदूलाल चुन्नीलाल देसाई ने जीत दर्ज की इसके बाद वह 1967 के चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस पार्टी की टिकट पर जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1973 में हुए उपचुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मणिबेन पटेल, 1977 में जनता पार्टी के एचएम पटेल ने जीत दर्ज की. 1980 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शांतुभाई पटेल, 1984 में जनता पार्टी के एचएम पटेल, 1989 में जनता दल के मगनभाई पटेल और 1991 में बीजेपी के मगनभाई पटेल, फिर 1996,1998 और 1999 में कांग्रेस की निशा चौधरी ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की है. 2001 और 2004 में यहां कांग्रेस पार्टी के मधुसूदन मिस्त्री. इसके बाद 2009 में बीजेपी के महेंद्रसिंह चौहान ने बाजी मारी.

आदिवासी बहुल है साबरकांठा

साबरकांठा लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत प्रांतिज, मोडासा, खेड़ब्रह्मा, बयाद, इदर और भिलोडा विधानसभा सीट शामिल है.साबरकांठा में कुल 18,01,717 मतदाता है. इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 8,75,896 और महिला मतदाताओें की संख्या 9,25,768 है. जबकि थर्ड जेंडर मतदाता 53 हैं. 2019 में कुल मतदान प्रतिशत 67.62% था. इस क्षेत्र की जनसंख्या 24 लाख से ज्यादा है. इसमें से 85 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. इस सीट पर आदिवासी वोटरों का प्रभुत्व है. यही वोट बैंक यहां पर उम्मीदवारों की जीत हार का फैसला करता है. बीजेपी ने यहां भीखाजी ठाकोर को उम्मीदवार बनाया था लेकन उन्होंने निजी कारणों का हवाला देकर चुनाव लड़ने से मना कर दिया है

साबरकांठा ब्रिटिश शासनकाल में राजनीतिक एजेंसी थी. इसका प्रशासनिक केंद्र हिम्मतनगर है. इस जिले में ज्यादातर आबादी भील और दूसरे आदिवासियों की है. स्वतंत्रता के बाद यहां हरना नदी और हथमाटी नदी पर बांध बनाए गए हैं.



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