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Wednesday, July 17, 2024
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Jalna lok sabha seat congress bjp shiv sena raosaheb patil | जालना लोकसभा सीट: बीजेपी पर गढ़ बचाने का रहेगा दबाव, मराठवाड़ा की अहम सीट


जालना लोकसभा सीट: बीजेपी पर गढ़ बचाने का रहेगा दबाव, मराठवाड़ा की अहम सीट

जालना लोकसभा सीट

महाराष्ट्री की 48 सीटों में से एक जालना लोकसभा सीट भी है. यह सीट मराठवाड़ा क्षेत्र में आती और यह महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है. लोकसभा सीट के साथ-साथ जालना एक जिला भी है. जालना पहले निजाम राज्य का हिस्सा था और मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम के बाद संभाजीनगर (उस समय औरंगाबाद) की एक तहसील के रूप में भारत का हिस्सा बन गया. जालना जिला, जो पहले औरंगाबाद जिले का एक हिस्सा था.

जालना जिले की सीमाएं पूर्व में परभणी और बुलढाणा, पश्चिम में औरंगाबाद, उत्तर में जलगांव और दक्षिण में बीड से सटी हुई हैं. जालना जिले का क्षेत्रफल 7,612 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 2.47 फीसदी है. जिला मुख्यालय जालना में है और ब्रॉड गेज रेलवे लाइन द्वारा राज्य की राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है.

कई पर्यटन स्थल भी हैं

जालना लोकसभा सीट के अंतर्गत पर्यटन के कई स्थल भी हैं. यहां जालना किला भी मौजूद है. इसके अलावा मोती लेक, छत्रपति संभाजी उद्यान, घानेवाड़ी झील, स्वामी विवेकानन्द आश्रम जैसे कई और भी छोटे बड़े पर्यटक स्थल हैं जहां पर हजारों की संख्या में लोग घुमने के लिए पहुंचते हैं.

जालना लोकसभा सीट के राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो यहां पहली बार 1952 में आम चुनाव हुए थे तब कांग्रेस के हनुमंतराव गणेशराव वैष्णव सांसद चुने गए थे. 1957 में भी कांग्रेस ही रही और सैफ तैयबजी सांसद रहे. ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने हनुमंतराव गणेशराव वैष्णव की जगह सैफ तैयबजी को मैदान में उतारा था. इसके बाद यहां 1957 में ही उपचुनाव हुए और पीजेंट एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया के एवी घरे सांसद निर्वाचित हुए. 1960 के चुनाव में कांग्रेस के रामराव नारायण राव सांसद बने. 1967 में कांग्रेस के वीएन जाधव, 1971 में बाबूराव काले सांसद चुने गए.

1989 में बीजेपी की वापसी हुई

1977 के चुनाव में जनता पार्टी के पुंडलिक हरि दानवे सांसद निर्वाचित हुए. 1980 से 1984 तक यह सीट कांग्रेस के पास रही और बालासाहेब पवार सांसद रहे. 1989 में यह सीट बीजेपी के पाले में चली गई और पुंडलिक हरि दानवे फिर से सांसद चुने गए. ये वो दौर था जब बीजेपी कुछ साल पहले ही राजनीतिक पार्टी बनकर मैदान में उतरी थी. 1991 के चुनाव में सीट पर सियासी समीकरण बदले और यह एक बार फिर से कांग्रेस के पाले में चली गई और अंकुशराव टोपे सांसद बने. 1996 और 1998 में बीजेपी की फिर से वापसी हुई और उत्तम सिंह पवार सांसद बने. इसके बाद से ही यह सीट बीजेपी के पास ही रही. 1999 से रावसाहेब दानवे सांसद बने.

2019 में दो प्रतिशत कम मतदान हुआ था

2019 के लोकसभा चुनाव में जालना सीट पर तीसरे चरण में मतदान 23 अप्रैल को हुआ था. इस साल यहां 64.50 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई. इस निर्वाचन क्षेत्र में 2014 की तुलना में 2019 में मतदान प्रतिशत दो प्रतिशत कम हो गया था इस सीट पर बीजेपी से प्रदेश अध्यक्ष रावसाहेब दानवे, कांग्रेस से विलास औताडे और वंचित बहुजन अघाड़ी से शरद चंद्र वानखेड़े के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था.

चुनाव में दानवे को 698,019 वोट मिले थे जबकि जबकि विलास औताडे को 3,65,204 वोट मिले थे. इस तरह से देखें तो बीजेपी उम्मीदवार को 3,32,815 वोट मिले. चुनाव में 12,09,096 मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया था.



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